शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

बन के ख्वाब दिलों को  जलाना नहीं अच्छा |
लगा के दिल फिर हाथ  छुड़ाना नहीं अच्छा ||

अफ़सोस कि इस बात को समझा नहीं इन्सान |
गर उठा नहीं सकते तो गिराना नहीं अच्छा ||

खतों के सिलसिलों में बात ये भी रही शामिल |
सफ़र में थकने का ए दोस्त बहाना नहीं अच्छा ||

तू  अपने  गिरेवान को  झांक कर तो देख  |
किस बात पर कहते हो  जमाना नहीं अच्छा  ||

मुद्दत से प्यासा हूँ  मगर सहरा में रहने दो |
बना कर  अश्क आँखों से बहाना नहीं अच्छा ||

14 टिप्‍पणियां:

nikhil ने कहा…

ये हुई बात बहुत सही नजरिया है दोस्त मान गए
ग़ज़ल सुनाने के लिए बहुत -२ धन्यवाद .............

mayur ने कहा…

लिखते हो एसा की दिल में उतर जाते हो
बहुत ही गज़ब के शेर|

मुद्दत से प्यासा हूँ मगर सहरा में रहने दो |
बना कर अश्क आँखों से बहाना नहीं अच्छा ||

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ||

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा .....

वाह ......... सुभान अल्ला ...... क्या लाजवाब शेर कहा है .....
सच है दूसरों को दोष देने से पहले अपने गिरेबान में झाँकना ज़रूरी है .......

sakshi ने कहा…

बहुत खूब बड़ी ही सादगी से इतनी बड़ी बात कह दी .....
मुद्दत से प्यासा हूँ मगर सहरा में रहने दो |
बना कर अश्क आँखों से बहाना नहीं अच्छा||
बहुत बेहतरीन शेर बहुत -२ धन्यवाद सिंह साहब

Babli ने कहा…

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिपण्णी देने के लिए! मेरे इस ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है -
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com
तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ||
बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है ! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है!

योगेश स्वप्न ने कहा…

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ||


bahut behatareen. badhaai.

shriraj ने कहा…

bahut acche
good yaar

KAVITA RAWAT ने कहा…

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ||
मुद्दत से प्यासा हूँ मगर सहरा में रहने दो |
बना कर अश्क आँखों से बहाना नहीं अच्छा ||
......bahut Achhi rachana.
bahut shubhkamnayen.

sada ने कहा…

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ।

जितनी सहजता लिये हुये यह पंक्तियां हैं, उतनी ही गहराई लिये हुये इनका अर्थ है, बहुत ही सुन्‍दर रचना ।

singhsdm ने कहा…

Very nice ghazal........! selection of words and expression of feelings are in very touchy form....due to some technical fault on ur blog i coulg not respond u on time....Although very beautiful poem!
KEEP IT UP.........GUY!

Devendra ने कहा…

तू अपने गिरेवान को झांक कर तो देख |
किस बात पर कहते हो जमाना नहीं अच्छा ||
--यह तो खूब कही
वाह! क्या बात कही..

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

क्या खूब भाव है बस थोड़ी
लय और दुरुस्त होने जरूरत है ..
................आभार ,,,

shyam1950 ने कहा…

nahin yar khali poli wah wah mein mera yakeen nahin gazal beshak acchi hai lekin ISHQ GAZAL AUR GEET SE BAHAR NIKAL KAR JINDGI KA RADDE AMAL BANNA CHAHIYE BECHARA SUKRAT BHI YAHI KAHTE KAHTE JAHAR PEE GYA LEKIN DUNIYA KO AAJ TAK AKAL NAHIN AA RAHI upar TRIPATHI JI ki tippani se sahmat hoon

Apanatva ने कहा…

bahut sunder gazal hai ek ek sher me gahrai chupee hai bada accha laga aapake blog par aakar .

खोजें