रूठना मनाना तो चलता रहेगा |
तेरा दर्द-ए-दिल निकलता रहेगा ||
मिले है मिलेंगे दो दिल दीवाने |
जमाना यूँ ही हाथ मलता रहेगा ||
मेरा दिल दीवाना बन के तमन्ना |
तेरी बाजुओं में मचलता रहेगा ||
करोगे जो वादे निभा ना सकोगे |
बहनों में दम यूँ ही घुटता रहेगा ||
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे |
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा ||
14 टिप्पणियां:
हर रंग को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा
इंसान की फ़ितरत को बहुत अच्छा परखा है ... लाजवाब शेर है ....
बहुत सुन्दर गज़ल. बधाई.
शब्दों का अनूठा संगम,अच्छी गज़ल.
विकास पाण्डेय
www.विचारो का दर्पण.blogspot.com
बढिय़ा रचना. मजेदार
pushpendra bhai,
sbahd nahi mil rahey hain vyakhyaan karne ke liye, aap to mahaarathi hai bhai...
kya qatal rachna likhi hai....
mazaa aa gaya padh ke bhai..
keep writing.
bahut achha likha hai.
ग़ज़ल क़ाबिले-तारीफ़ है।
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे |
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा
बहुत खूब
bahut hi khoobsurat gazal.
poonam
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे |
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा ||
Sundar alfaaz aur bhavon se saji rachana!
अब रंगत बढती जा रही है.......ख़याल को शेरी तहज़ीब में ढाल देने- पिरो डालने में जो कुव्वत चाहिए वो अब दिखने लगी है........वाह जी वाह क्या खूब लिखा है.............
करोगे जो वादे निभा ना सकोगे |
बहनों* में दम यूँ ही घुटता रहेगा || ( बहानों)
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे |
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा ||
मुक़र्रर ...........!
lajbab ...............
मेरा दिल दीवाना बन के तमन्ना |
तेरी बाजुओं में मचलता रहेगा ||
wah...wah.............
लगा के इन्सान चहरे पे चेहरे |
दुनियाँ को यूँ ही छलता रहेगा ||
dhanyavad
शानदार शेर दोस्त
मिले है मिलेंगे दो दिल दीवाने |
जमाना यूँ ही हाथ मलता रहेगा ||
मज़ा अगया सोई हुई दीवानगी
जगा दी अपने |
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