शुक्रवार, 12 मार्च 2010

दिलजलों से दिल लगाना चाहिए

दिलजलों से दिल लगाना चाहिए |
गिर गया उसको उठाना चाहिए ||

इंसानियत का यही उसूल है |
वादा कर के निभाना चाहिए ||

टूटती हर मजहब की दीवार हो |
अमन का ऐसा जमाना चाहिए ||

नेक करने का इरादा जो बने |
अहम का रावण जलाना चाहिए ||

वक़्त निकले जो इबादत के लिए
दर्द सब का बंटाना चाहिए ||

दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||

20 टिप्‍पणियां:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

bhai ji...

aap likhte rahiye aise hee umdaa...
humein to aapko padhne ka bahaana chahiye..

wah wah wah....
kya likha hai bhai ji...
mubaarkaan!!

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर ने कहा…

आपने बड़े ख़ूबसूरत ख़यालों से सजा कर एक निहायत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।

लता 'हया' ने कहा…

शुक्रिया ,
देर से आने के लिए माज़रत चाहती हूँ ,
उम्दा पोस्ट .

रंजीत ने कहा…

kya baat hai ! dua bhee mangee to jawane kee salamatee ke liye ...
warna diljale se kaun dil lagata hai yahan ?

congggggtttt

Hitesh ने कहा…

दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||

बहुत खूब ! बेहतरीन शायरी.

योगेश स्वप्न ने कहा…

दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||


behad umda.

Ashish (Ashu) ने कहा…

टूटती हर मजहब की दीवार हो |
अमन का ऐसा जमाना चाहिए ||
वाकई सही कहा आपने...बेहतरीन..शुक्रिया
आशू

singhsdm ने कहा…

waah ji waah....
kya likh rahe ho miyan.....
har nayee ghazal pahle se nikhar jati hai....
badhai....!

Babli ने कहा…

वाह वाह क्या बात है! आपने उम्दा ग़ज़ल लिखा है! बेहद पसंद आया!

ज्योति सिंह ने कहा…

दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||
bahut hi khoob ,aapke blog par aa aakar lautna padta hai aur is baat ka afsos bhi hota hai ,lekin aadha ghanta ek ghanta lag jaata tippani box khulne me aur kabhi to wapas hona padta hai .

sakshi ने कहा…

psingh ji
is gajal ke liye mere pas shabd nahi hai
दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||
kya dard hai ia sher me
badhai................

nikhil ने कहा…

lajbab rachna
singh sahab kya likh diya apne
इंसानियत का यही उसूल है |
वादा कर के निभाना चाहिए ||
vakai insaniyat to kho hi gayi hai accha massage pata hai apki yahi bat mujhe gazal padhne par majboor karti hai

shriraj ने कहा…

दूटने की आहट न आह की आवाज हो |
दर्द को ऐसा दीवाना चाहिए ||
main to aisa hi deewana hoon.
bahut achhe, kya khoob likha

रश्मि प्रभा... ने कहा…

नेक करने का इरादा जो बने |
अहम का रावण जलाना चाहिए ||
bilkul sahi kaha

निर्मला कपिला ने कहा…

टूटती हर मजहब की दीवार हो |
अमन का ऐसा जमाना चाहिए ||

नेक करने का इरादा जो बने |
अहम का रावण जलाना चाहिए |ैअच्छी रचना है। बधाई

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

टूटती हर मजहब की दीवार हो |
अमन का ऐसा जमाना चाहिए ||
...प्रभावशाली अभिव्यक्ति,बधाई!!!

sakhi with feelings ने कहा…

एक खूबसूरत अल्फाजो से सजी गज़ल से रु-बी-रु हुई आपके ब्लॉग पर...

और रचनाये भी पड़ी अच्छी लगी

shama ने कहा…

दिलजलों से दिल लगाना चाहिए |
गिर गया उसको उठाना चाहिए ||
Ek se badhke ek rachanayen hain!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वक़्त निकले जो इबादत के लिए
दर्द सब का बंटाना चाहिए ..

आपकी ग़ज़ल में कुश शेर अक्सर नयी बात कहते हुवे लगते हैं ... बहुत कमाल का लिखा है ...

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