वक़्त की चाल कुछ बदली हुई है |
हर तरफ वर्फ सी पिघली हुई है ||
वो क्या हसीं मंजर है सोचो |
अँधेरी रात में चाँदनी पिघली हुई है ||
जरा तू बंद करके देख आँखें |
वही तस्वीर, पर धुंधली हुई है ||
भले ही इश्क से तौबा करली |
तमन्ना आज भी मचली हुई है ||
वक़्त की चाल कुछ बदली हुई है |
हर तरफ वर्फ सी पिघली हुई है ||
वो क्या हसीं मंजर है सोचो |
अँधेरी रात में चाँदनी पिघली हुई है ||
जरा तू बंद करके देख आँखें |
वही तस्वीर, पर धुंधली हुई है ||
भले ही इश्क से तौबा करली |
तमन्ना आज भी मचली हुई है ||
रात कटती नहीं सितारों से
हमें उल्फत रही बहारों से
कभी सीने पे जख्म खाते थे
अब डरता हूँ इन शरारों से
तेरा वजूद तो कुछ भी नहीं
तेरी पहचान है बिचारों से
यही पढता रहा किताबों में
सच भारी है झूठ हजारों से
कभी खुल के जुबां से बोल जरा
बात बनती नहीं इशारों से
कहते कहते बात अपनी कह गए |
हम अकेले थे अकेले रह गये ||
चुपके चुपके आइनों की बात सुन |
सिसकियाँ लेते वो आंसू बह गए ||
यादों की बारात अपने साथ थी |
भीड़ में होकर भी तन्हा रह गये ||
टूटते है कैसे लोग दुनियां में |
ठोकरें खाते किनारे कह गए ||
दिल से दिल मिलना तो गुजरी बात है |
हाथ हाथों से मिलाते रह गए ||
कहीं जमीं तो कहीं आसमां देखा है |
किसी भी उम्र में दिल जवां देखा है ||
न खींचो खून से सरहद की लकीरें |
दोनों तरफ अमन का कारवां देखा है ||
छलकती आँखों को पशेमां देखा है ||
