शनिवार, 14 नवंबर 2009

वाह वाह

आज फिर कुछ लिखने की इच्छा हुई यूँ तो लिखने की इच्छा हमेशा ही रहती है और लिखता भी रहता हूँ
पर कुछ हकीकत लिखने का दिल था तो आज कुछ पंक्तियाँ लेकर आप सभी दोस्तों से मुखातिब हुआ हूँ |

वाह वाह ......

बड़ा ही सुखमय शब्द है -वाह वाह
हर इन्सान की जरुरत भी है
और मज़बूरी भी
क्योंकि हर इन्सान इस का आदी हो चुका है
अन्दर का खोखलापन इतना ज्यादा बढ़ गया है
की इसे टोनिक की तरह ले रहा है
बगैर इसके जीना मुश्किल हो गया है
सामजिक कार्य हो या धार्मिक
सब के पीछे लालच सिर्फ एक ........
कोई कवी अगर कोई कविता लिखता है
तो एवज में चाहता है सिर्फ .........
इसके लिए इन्सान कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है
हर मकसद के पीछे मकसद है सिर्फ ..................
पर इस अम्रत रूपी शब्द का रहस्य
इतना भी असान नहीं
लाखों लोगों को ये गर्त में भी ले गया
क्योंकि वे इस के लायक नहीं थे
लोगों ने जूठी ही कर दी .........
क्रपया इस वाह वाह से बचें
अपना स्वम् निरिक्षण करें

3 टिप्‍पणियां:

nikhil ने कहा…

bhut hi sundar topic pakda
hai hujur

mayur ने कहा…

सभी इस वाह वाह में ही तो लगे है
कमाल .................. बहुत बहुत धन्यवाद आपको
पर अब एक गज़ल भी कह दो

शिवम् मिश्रा ने कहा…

वाह वाह ......

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