कौन कहता इश्क में मंजिल नहीं मिलती |
खुदाया बख्श दे ऐसी नियामत आज उनको |
गैरों की छोड़ो बात हम अपनों की करते है
ये कौन सी दुनिया में आ गये है हम |
दिल का बोझ हटाना होगा |
सब को गले लगाना होगा ||
तोड़ के रिश्ते देख लिया जो |
कीमत वही चुकाना होगा ||
किसने दी है दिल को दस्तक |
कोई जख्म पुराना होगा ||
आओ तोड़ें चाँद सितारे |
बच्चों को बहलाना होगा ||
हर कंधे पर उम्मीदें है |
करके कुछ दिखलाना होगा ||
बातें करना प्यार वफ़ा की |
गुजरा हुआ जमाना होगा ||
वक़्त की चाल कुछ बदली हुई है |
हर तरफ वर्फ सी पिघली हुई है ||
वो क्या हसीं मंजर है सोचो |
अँधेरी रात में चाँदनी पिघली हुई है ||
जरा तू बंद करके देख आँखें |
वही तस्वीर, पर धुंधली हुई है ||
भले ही इश्क से तौबा करली |
तमन्ना आज भी मचली हुई है ||
रात कटती नहीं सितारों से
हमें उल्फत रही बहारों से
कभी सीने पे जख्म खाते थे
अब डरता हूँ इन शरारों से
तेरा वजूद तो कुछ भी नहीं
तेरी पहचान है बिचारों से
यही पढता रहा किताबों में
सच भारी है झूठ हजारों से
कभी खुल के जुबां से बोल जरा
बात बनती नहीं इशारों से