मंगलवार, 17 जनवरी 2012

चलो अंजुमन में.......

चलो अंजुमन में कोई बात होगी |

मेरी हर तमन्ना तेरे साथ होगी ||


सूरज को तुमसे मुहब्बत है इतनी |

चले जाओगे जब तभी रात होगी ||


हँसते हो तो फूल खिलते चमन में

अगर है उदासी तो बरसात होगी ||


दुनियां ये कहकर हंसती है हम पर |

उदासी चमन की तेरे हाथ होगी ||


तुम जो ये नज़रें चुराते हो ऐसे |

दिल की हमारे शह और मात होगी ||

6 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

क्या बात है ... बहुत खूब !


बस यह चीज़ खटक रही है ... 'शह और मात' ना कि 'सह और मात' ...

परमजीत सिँह बाली ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत बढिया रचना है।बधाई स्वीकारें।

psingh ने कहा…

thanks
shivam........

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

pushpinder bhai....bade dino ke baad aaye lekin durust aaye.....khoobsurat rachnaa!!!

shama ने कहा…

सूरज को तुमसे मुहब्बत है इतनी |

चले जाओगे जब तभी रात होगी ||


हँसते हो तो फूल खिलते चमन में

अगर है उदासी तो बरसात होगी ||
Bahut sundar!

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