शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

ऊँचे ओहदे दुनियां पीछे.....

ऊँचे ओहदे दुनियां पीछे |
ऑंखें मीचे आँखे मीचे ||

पैसे में है सारी ताकत ||

कौन है ऊपर कौन है नीचे ||

फर्क अमीरी और गरीबी |

एक चांदनी एक गलीचे ||

फूटी कौड़ी पास नहीं है |

जीवन काटा मुटठी भीचे ||

अपनी किस्मत में है बंजर |

तुम्हे मुबारक बाग बगीचे ||

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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कल शाम से नेट की समस्या से जूझ रहा था। इसलिए कहीं कमेंट करने भी नहीं जा सका। अब नेट चला है तो आपके ब्लॉग पर पहुँचा हूँ!
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आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

अपनी किस्मत में है बंजर |
तुम्हे मुबारक बाग बगीचे ||
वाह! बहुत बढ़िया...
हार्दिक बधाई..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

bahut khoob ... lajawaab gazal hai .. har sher maayaab ...

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