बुद्ध हँसते है मुस्कराते है |
पैदा होने की सजा पाते है ||
जिन्दा रहते तो समझे नहीं |
घर में तस्वीर अब सजाते है ||
देश को जकड़ा है भ्रष्टाचार ने |
गीत दौलत के गुनगुनते है ||
बड़ी मजबूर धरती माँ हमारी |
संसद में बोलियाँ लगाते है ||
भूख से दम तोड़ता इन्सान है |
अनाज गोदाम में सड़ाते है ||
यही इस देश का दुर्भग्य है |
झुके कंधे देश चलाते है ||
मंगलवार, 26 जुलाई 2011
शुक्रवार, 24 जून 2011
बीती बातें...................!
बीती बातें दिल से लगाना ठीक नहीं |
बात बात पर बात बनाना ठीक नहीं |प्यार मुहब्बत बातें अच्छी लगती है |
आँखों से दिल का रास्ता ठीक नहीं ||ये धरती शरशब्ज लगे तो अच्छा है |
खेतों में तलवारें बोना ठीक नहीं ||सरहद को देखा तो फिर अहसास हुआ |
आंगन में दीवारें होना ठीक नहीं ||खुद में इन्सां देखो कितना बदल गया |
कहते है सब लोग जमाना ठीक नहीं ||बुधवार, 13 अप्रैल 2011
कहीं चन्दा कहीं.....
कहीं चन्दा कहीं तारे कही जुगनू चमकते है |
हजारों खुशबुएँ नाकाम है जब वो महकते है ||
कौन कहता इश्क में मंजिल नहीं मिलती |
मुहब्बत की कशिश से दोस्तों पत्थर पिघलते है ||
खुदाया बख्श दे ऐसी नियामत आज उनको |
हजारों फूल हों पैदा जहाँ पत्थर निकलते है ||
गैरों की छोड़ो बात हम अपनों की करते है
गर्दिश में जो हों तारे यहाँ चहरे बदलते है ||
ये कौन सी दुनिया में आ गये है हम |
अमन के फूल खिलते थे वहां शोले दहकते है ||
मंगलवार, 2 नवंबर 2010
दिल का बोझ हटाना होगा ..........
दिल का बोझ हटाना होगा |
सब को गले लगाना होगा ||
तोड़ के रिश्ते देख लिया जो |
कीमत वही चुकाना होगा ||
किसने दी है दिल को दस्तक |
कोई जख्म पुराना होगा ||
आओ तोड़ें चाँद सितारे |
बच्चों को बहलाना होगा ||
हर कंधे पर उम्मीदें है |
करके कुछ दिखलाना होगा ||
बातें करना प्यार वफ़ा की |
गुजरा हुआ जमाना होगा ||
सोमवार, 27 सितंबर 2010
हमने छोड़ा शहर ज़माने के लिए.......
अपने ही जख्म छुपाने के लिए |
हमने छोड़ा शहर ज़माने के लिए ||
ये किस राह का में रह गुजर हूँ |
कोई पत्थर नहीं उठाने के लिए ||
भले ही लाखों जख्म खाए लेकिन |
दिल है तैयार लगाने के लिए ||
सभी है अपने में मशरूफ साकी |
तुम भी रूठे हो मानाने के लिए ||
यहाँ तो है सभी कातिल निगाहें |
नजर के तीर चलाने के लिए ||
रविवार, 1 अगस्त 2010
सिलसिला
सिलसिला इश्क यूँ ही चलने दो |
लोग जलते है जलें जलने दो ||
लोग जलते है जलें जलने दो ||
लूट कर ले गए वो ख्वाब सभी |
बातों बातों में रात ढलने दो ||
बातों बातों में रात ढलने दो ||
फिर संभल जाएगी हर बहर अपनी |
उनके होठों की गजल बनने दो ||
उनके होठों की गजल बनने दो ||
दिल का मिलना तो दूजी बात है |
पहले हाथों से हाथ मिलने दो ||
(और यह शेर मैने अपने बड़े भइया परम आदर्णीय "पवन जी" के लिए लिखा है )
बस यही इल्तजा रही उनसे |
अपने पैरों की धूल बनने दो ||
अपने पैरों की धूल बनने दो ||
गुरुवार, 24 जून 2010
फासले दरमियाँ................
वो हमें हम उन्हें पास लाते रहे
फासले दरमियाँ फिर भी आते रहे
वो गए छोड़ कर हम को ऐसे कहीं
कुछ हकीकत से अपना न था वास्ता
गीत ख्वाबों के हम गुन गुनाते रहे
अब तलक अपने दिल में अँधेरा रहा
ज्ञान की लौ सभी को दिखाते रहे
लोग आते रहे लोग जाते रहे
फासले दरमियाँ फिर भी आते रहे
वो गए छोड़ कर हम को ऐसे कहीं
रास्तों पर शमाँ हम जलाते रहे
कुछ हकीकत से अपना न था वास्ता
गीत ख्वाबों के हम गुन गुनाते रहे
अब तलक अपने दिल में अँधेरा रहा
ज्ञान की लौ सभी को दिखाते रहे
हर लहर के मुकद्दर में साहिल नहीं
हौसले टूट कर मुस्कराते रहे
लाख मंजिल तलाशी मगर हमसफ़र
लोग आते रहे लोग जाते रहे
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