सूरज को तुमसे मुहब्बत है इतनी |
चले जाओगे जब तभी रात होगी ||
हँसते हो तो फूल खिलते चमन में
अगर है उदासी तो बरसात होगी ||
दुनियां ये कहकर हंसती है हम पर |
उदासी चमन की तेरे हाथ होगी ||
तुम जो ये नज़रें चुराते हो ऐसे |
दिल की हमारे शह और मात होगी ||
सूरज को तुमसे मुहब्बत है इतनी |
चले जाओगे जब तभी रात होगी ||
हँसते हो तो फूल खिलते चमन में
अगर है उदासी तो बरसात होगी ||
दुनियां ये कहकर हंसती है हम पर |
उदासी चमन की तेरे हाथ होगी ||
तुम जो ये नज़रें चुराते हो ऐसे |
दिल की हमारे शह और मात होगी ||
आइने खुद को दगा देते है |
हकीकत चहरो की बता देते है ||
जरा सा प्यार से पूछा किसी ने |
रास्ता अपने घर का बता देते है ||
जुल्म जब हद से गुजर जाता है |
अपने भी हाथ उठा देते है ||
शर्द मौसम में शाम ढलते ही |
दरवाजे दिल के लगा देते है ||
घर से निकले थे इबादत के लिए |
किसी रोते को हंसा देते है ||
चलो कुछ हट के कोई बात करें |
आग दुनियां को लगा देते है ||
बीती बातें दिल से लगाना ठीक नहीं |
बात बात पर बात बनाना ठीक नहीं |प्यार मुहब्बत बातें अच्छी लगती है |
आँखों से दिल का रास्ता ठीक नहीं ||ये धरती शरशब्ज लगे तो अच्छा है |
खेतों में तलवारें बोना ठीक नहीं ||सरहद को देखा तो फिर अहसास हुआ |
आंगन में दीवारें होना ठीक नहीं ||खुद में इन्सां देखो कितना बदल गया |
कहते है सब लोग जमाना ठीक नहीं ||दिल का बोझ हटाना होगा |
सब को गले लगाना होगा ||
तोड़ के रिश्ते देख लिया जो |
कीमत वही चुकाना होगा ||
किसने दी है दिल को दस्तक |
कोई जख्म पुराना होगा ||
आओ तोड़ें चाँद सितारे |
बच्चों को बहलाना होगा ||
हर कंधे पर उम्मीदें है |
करके कुछ दिखलाना होगा ||
बातें करना प्यार वफ़ा की |
गुजरा हुआ जमाना होगा ||